Tuesday, December 8, 2009

जिंदगी की कहानी


मैं एक कदम चलता और एक पल को रुकता मगर .........
इस एक पल मैं जिंदगी मुझसे चार कदम आगे निकल जाती।
मैं फिर एक कदम चलता और एक पल को रुकता और.........
जिंदगी फिर मुझसे चार कदम आगे निकल जाती।
यूँ ही जिंदगी को जीतता देख मैं मुस्कुराता और ...............
जिंदगी मेरी मुस्कराहट पे हैरान होती।
ये सिलसिला यूँ ही चलता रहा ..........
फिर एक दिन मुझे हँसता देख एक सितारे ने मुझसे पुछा...
´ तुम हार कर भी मुस्कुराते हो! क्या तुम्हे दुःख नही होता हार का ?´
तब मैंने कहा ................
मुझे पता है कि एक ऐसी सरहद आएगी जहाँ से आगे
जिंदगी एक कदम भी आगे न बढ़ पाएगी
तब जिंदगी मेरा इंतजार करेगी और मैं........
तब भी मैं यूँ ही चलता रुकता अपनी रफ़्तार से अपनी धुन में वहां पहुंचूगा।
एक पल रुक कर जिंदगी को देख मुस्कुराऊंगा
बीते सफर को एक नज़र देख अपने कदम फिर बढाऊंगा
ठीक उसी पल मैं जिंदगी से जीत जाऊंगा
मैं अपनी हार पर भी मुस्कुराता था और जीत पर भी
मगर जिंदगी न अपनी जीत पर मुस्कुरा पाई थी और न हार पर रो पायेगी।

Sunday, October 18, 2009

मनु


ये मेरी बुआ का बड़ा बेटा मृणाल है; मगर हम लोग उसे मनु कहते हैं। वैसे तो वो पढने लिखने में काफी तेज़ है, (शक्ल से ही लगता है ) मगर है एकदम दब्बू क्योंकि कभी-कभी मेरे मन में ख्याल आता है की वो एक किताबी कीड़ा है , जरूरत से कहीं ज्यादा सीधा, और थोड़ा डरपोक भी क्योंकि आज तक उसने मेरे साथ कभी भी सड़क पर करते समय मेरा हाथ नहीं छोड़ा मगर इन सबके बाद भी मेरा सबसे अच्छा भाई है।
मेरे सभी भाई-बहनों में मुझे उसका साथ सबसे ज्यादा भाता है।
वैसे तो वो रिहन्दनगर में रहता है मगर वो कभी - कभी जैसे की सर्दी और गर्मियों की छुट्टियों , दशहरे और किसी दूसरे मौके पर इलाहबाद आता रहता है।
उसके घर पर भी कुछ दिनों में कंप्यूटर आने वाला है , मुझे भी इसका इन्तजार है क्योंकि फिर मै और वो चैटिंग कर सकेंगे ।
अब आप लोग मनु के बारे थोड़ा बहुत जान गए होंगे। आगे फिर कभी ....................

Saturday, October 17, 2009

मेरा पहला पोस्ट

आज मैंने अपना ब्लॉग बनाया। कल दिवाली थी, पर हमलोगों ने बहुत धूम - धाम से नही मनाई.
खैर इस समय १२ बज रहे हैं Star Plus पर द्रोणा आने वाली है और मैं इसे देखने का मौका नही गवाना चाहता।
वैसे तो मेरी छुट्टियाँ परसों यानि मंगलवार से ख़त्म हो रहीं है